मस्त विचार 1748
कैसे कह दूँ कि मेरी…..हर दुआ बेअसर हो गई,
मै जब जब भी रोया….मेरे मुरशद को खबर हो गई..
मै जब जब भी रोया….मेरे मुरशद को खबर हो गई..
वक़्त को दवा कहा और ख्वाहिशों से परहेज सुनाया.
नजदीकियां कितनी खास थी….!!
“दुआ” मिले बड़ो से.. “साथ” मिले अपनों से..
“खुशियां” मिले जग से.. “रहमत” मिले रब से..
“प्यार” मिले सब से.. “यही “दुआ” है रब से..
सब खुश रहे आप से और आप खुश रहे सबसे.!!
“दुनियां के रेन बसेरे में..पता नही कितने दिन रहना है”
“जीत लो सबके दिलो को..बस यही जीवन का गहना है”..!!
मेरे चहरे पर कोई जंची ही नहीं.
जब हकीकत यही है, तो इंसान को गरूर किस बात का है.