मस्त विचार 1553
मैं इत्र से महकूँ, ये आरजू नहीं है.
तमन्ना है मेरे किरदार से खुशबू आये.
तमन्ना है मेरे किरदार से खुशबू आये.
आदमी का खुद का गम क्या कम होता है.
अपनों से ना उलझो गैरों की बातों पर.
जब तू कबूल है तो तेरा सब कुछ कबूल है ….!!!
गम में भी मुश्कुराने पर मजबूर कर दिया !!
आप भी शामिल हैं उन गिनती के लोगों में !
जिन्होंने हमें काँच से कोहिनूर कर दिया !!
जो लौट कर उसी पर गिरता है, जिसने उसे फेंका था.