मस्त विचार – मिलते जुलते रहा करो – 1541

मिलते जुलते रहा करो

धार वक़्त की बड़ी प्रबल है, इसमें लय से बहा करो,

जीवन कितना क्षणभंगुर है, मिलते जुलते रहा करो.

यादों की भरपूर पोटली, क्षणभर में न बिखर जाए,

दोस्तों की अनकही कहानी, तुम भी थोड़ी कहा करो.

हँसते चेहरों के पीछे भी, दर्द भरा हो सकता है,

यही सोच मन में रखकर के, हाथ दोस्त का गहा करो.

सबके अपने-अपने दुःख हैं, अपनी-अपनी पीड़ा है,

यारों के संग थोड़े से दुःख, मिलजुल कर के सहा करो.

किसका साथ कहाँ तक होगा, कौन भला कह सकता है,

मिलने के कुछ नए बहाने, रचते-बुनते रहा करो.

मिलने जुलने से कुछ यादें, फिर ताज़ा हो उठती हैं,

इसीलिए यारों नाहक भी, मिलते जुलते रहा करो.

मस्त विचार 1539

जिन्हें अपने अंदर कोई गलती नज़र नहीं आती,

उन्हें दूसरों में ग़लतियों के अलावा कुछ नज़र नहीं आता.

मस्त विचार 1538

दुनियां के रैन बसेरे में पता नहीं कितने दिन रहना है,

जीत लो सबके दिलों को, बस यही जीवन का गहना है !!

मस्त विचार 1537

खुदा तू भी कमाल का कारीगर निकला..,

खींच क्या दी दो तीन लकीर तूने हाथों मे..,

ये भोला इन्सान उसे तक़दीर समझने लगा…!!!

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