मस्त विचार 1701

पसीने की स्याही से जो लिखते हैं अपने इरादों को,

उनके मुकद्दर के पन्ने कभी कोरे नहीं हुआ करते.

मस्त विचार 1700

खाली पन्नों कि तरह ” दिन ” पलटते जा रहे हैं, _

_ खबर नहीं के ये ” आ रहे ” हैं या ” जा रहे ” हैं !!!

मस्त विचार 1696

थोड़ी सी इबादत बहुत सा सिला देती है,

गुलाब की तरह चेहरा खिला देती है,

*दोस्तों* की याद को दिल से जाने न देना,

कभी कभी छोटी सी दुआ अर्श हिला देती है.

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