मस्त विचार 1695
हर एक की सुनो और हर एक से सीखो,
क्योंकि हर कोई, सब कुछ नही जानता,
लेकिन हर एक कुछ ना कुछ ज़रुर जानता है.
क्योंकि हर कोई, सब कुछ नही जानता,
लेकिन हर एक कुछ ना कुछ ज़रुर जानता है.
सिर्फ ये जानने के लिए…कि नजदीक कौन है…
मंजिल तो बस वहीँ हैं, जहाँ ख्वाहिशें थम जाएं.
लेकिन उसके ख्वाब बड़े होने चाहिए.
उसके साथ खड़े रहने से अच्छा हैं, अकेले खड़ा रहना.
गरूर में रहोगे तो रास्ते भी न देख पाओगे.