मस्त विचार – 1502
अपनी राह शुद्ध रखो, पर दूसरों के लिए मन में दीवार मत खड़ी करो.
तूने ऐसी पिलाई निखर गया हूँ.
दुःख और गम सब भूल गया हूँ.
तेरे हाथों में पड़ कर खिल गया हूँ.
लेकिन कभी नहीं भूलते वो जो आप के कहने से वो महसूस करते हैं.
जाती हुई जवानी, आता बुढ़ापा देखा,
बदलती रुतों – रुखों का ढलता साया देखा,
जो बदले वो दुनिया, न बदला कभी वो खुदा देखा.
परखो तो कोई अपना नही, समझो तो कोई पराया नहीं…
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