मस्त विचार 1434
सबसे ज्यादा वही रोया जिसने इमानदारी से निभाए हैं.
सबसे ज्यादा वही रोया जिसने इमानदारी से निभाए हैं.
पहले पैसे नहीं थे अब ख्वाहिशें नहीं रहीं.
दर्द भी उसी ने दिया जो वजह थी मुस्कुराने की !!
आपको कांटों के साथ तालमेल बैठाना सीखना होगा.
हजारों जन्म लेते हैं, बनाना किसको आता है ?
कमाने के लिए सारे, खूब ही भागा करते हैं…
आप ही कह दो सही धन का कमाना किसको आता है ?
जरा से जोश में आकर वचन मुख से बोल देते हैं…
वक़्त पड़ने पर वचनों को निभाना किसको आता है ?
लगाते हैं मधुर प्रीति छणिक दो चार रोजों की…
मगर सच्ची मोहब्बत का लगाना किसको आता है ?
ये दुनिया है यहाँ जीवन बिताना किसको आता है ?
पत्थरों को मनाने….फूलों का क़त्ल कर आया हूँ…
गया था” गुनाहों की माफ़ी मांगने…
वहाँ एक और गुनाह कर आया हूँ.