मस्त विचार 1449
ज़िन्दगी चाहे एक दिन की हो, चाहे चार दिन की.
उसे ऐसे जीयो जैसे कि,
ज़िन्दगी तुम्हे नहीं मिली, ज़िन्दगी को तुम मिले हो.
उसे ऐसे जीयो जैसे कि,
ज़िन्दगी तुम्हे नहीं मिली, ज़िन्दगी को तुम मिले हो.
समझा-बुझा के उठा देती हैं जिम्मेदारियां.
फिर वो भी सुनाई देने लगता हैं जो,कभी कहा ही नहीं..
उजालों में चिरागों के मायने नहीं होते.
चुटकियाँ बजा के वो बोले…ऐसे, ऐसे, ऐसे…
और मेरे बुरे वक्त ने मुझे बताया है कि दुनिया कैसी है.