मस्त विचार 1387
बहाना कोई तो दे “ऐ ज़िन्दगी”
कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊं…
कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊं…
इंसान को देखना नहीं बस समझना सीखो.
मैं कैसे समझाऊँ कुछ दर्द सहने के काबिल नहीं होते.
हम तो कहकर भूल जाते हैं, मगर लोग उसे ध्यान रखते हैं.
खुद को बदलो तो, संसार बदल पाओगे.
किसी की कमियां क्यों निकालते फिरते हो.
खुद की निकालो तो गुणों की खान बन जाओगे.
_ पूरी दुनिया से भरोसा सा उठ जाता है..