मस्त विचार 1551
होश का पानी छिड़को मदहोशी की आँखों पर,
अपनों से ना उलझो गैरों की बातों पर.
अपनों से ना उलझो गैरों की बातों पर.
जब तू कबूल है तो तेरा सब कुछ कबूल है ….!!!
गम में भी मुश्कुराने पर मजबूर कर दिया !!
आप भी शामिल हैं उन गिनती के लोगों में !
जिन्होंने हमें काँच से कोहिनूर कर दिया !!
जो लौट कर उसी पर गिरता है, जिसने उसे फेंका था.
इसलिए शब्दों से सब को छुने की, कोशिश कर लेता हूँ.
जिसके पास सबकुछ है, उस से दुनियाँ जलती है.