मस्त विचार 1545

एक बार इंसान ने कोयल से कहा

“तू काली ना होती तो कितनी अच्छी होती”

सागर से कहा:- “तेरा पानी खारा ना होता तो कितना अच्छा होता”

गुलाब से कहा:- “तुझमें काँटे ना होते तो कितना अच्छा होता”

तब तीनों एक साथ बोले:-

“हे इंसान अगर तुझमें दूसरों की कमियाँ देखने की आदत ना होती तो तू कितना अच्छा होता”

मस्त विचार – मिलते जुलते रहा करो – 1541

मिलते जुलते रहा करो

धार वक़्त की बड़ी प्रबल है, इसमें लय से बहा करो,

जीवन कितना क्षणभंगुर है, मिलते जुलते रहा करो.

यादों की भरपूर पोटली, क्षणभर में न बिखर जाए,

दोस्तों की अनकही कहानी, तुम भी थोड़ी कहा करो.

हँसते चेहरों के पीछे भी, दर्द भरा हो सकता है,

यही सोच मन में रखकर के, हाथ दोस्त का गहा करो.

सबके अपने-अपने दुःख हैं, अपनी-अपनी पीड़ा है,

यारों के संग थोड़े से दुःख, मिलजुल कर के सहा करो.

किसका साथ कहाँ तक होगा, कौन भला कह सकता है,

मिलने के कुछ नए बहाने, रचते-बुनते रहा करो.

मिलने जुलने से कुछ यादें, फिर ताज़ा हो उठती हैं,

इसीलिए यारों नाहक भी, मिलते जुलते रहा करो.

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