| Sep 30, 2017 | मस्त विचार
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले.
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले,
डरता है जमाने की निगाहों से भला क्यों ?
इन्साफ तेरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले,
क्या ख़ाक वो जीना है जो अपने ही लिए हो,
खुद मिट के किसी और को मिटने से बचा ले,
टूटे हुए पतवार है कश्ती के तो हम क्या,
हारी हुई बाहों को ही पतवार बना दे.
| Sep 28, 2017 | मस्त विचार
ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब है,
जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिए.
| Sep 27, 2017 | मस्त विचार
सिर्फ दो ही वक़्त पर आपका साथ चाहिए,
एक तो अभी और एक हमेशा के लिए..।..
| Sep 26, 2017 | मस्त विचार
याद रखें ख़ुशी दूसरों से बढ़ती तो जरूर है,
लेकिन दूसरों पर निर्भर नहीं करती.
| Sep 25, 2017 | मस्त विचार
कागज़ की कश्तियों में सवारी का शौक था.
अब ये शिकायतें है कि किनारा नहीं मिला.
| Sep 24, 2017 | मस्त विचार
मै शुक्रिया करूँ तेरा तो कहाँ तक करूँ,
मैने सर झुकाया कम…….. तेरे एहसान बहुत हैं.