मस्त विचार 1324
अपने आज पर इतना न इतरा यारो,
वक़्त की धारा में अच्छे अच्छे को मजबूर हुआ देखा है.
वक़्त की धारा में अच्छे अच्छे को मजबूर हुआ देखा है.
तो उसे खुद कीजिये.
कैसे कह दूँ गम से घबराता नहीं.
मिल गए तुम यार तो सहारा मिला.
या सब से बुरी मालकिन.
पर उम्र भर के वास्ते, आराम हो गया.