मस्त विचार 1438
थक कर बैठा हूँ हार कर नहीं,
सिर्फ बाजी हाथ से निकली है जिंदगी नहीं.
सिर्फ बाजी हाथ से निकली है जिंदगी नहीं.
मेरा वक़्त अब अच्छा ही रहेगा
मैंने समझौता जो कर लिया है.
_ वो लोग सारा दोष हालातों पर ही डाल देते हैं ..
सबसे ज्यादा वही रोया जिसने इमानदारी से निभाए हैं.
पहले पैसे नहीं थे अब ख्वाहिशें नहीं रहीं.