मस्त विचार 1161

मत पूछो तुम परिचय मेरा, मैं राही दीवाना.

ऊँची – नीची डगर हमारी, पथरीली चट्टानें.

बिछे हुए हैं पग-पग पर काँटें, देख लगे मुस्काने.

सहता दुःख की चोट निरन्तर,पर आगे बढ़ते जाना.

हँसता रहता, कभी अधर पर अपने आह न लाता.

जिसे न कोई सुनने वाला, मैं हूँ वह अफसाना.

मत पूछो तुम परिचय मेरा, मैं राही दीवाना.

मस्त विचार 1160

जन्म अपने हाथ में नही, मरण अपने हाथ में नही,

मगर जीवन को अपने तरीके से जीना

अपने हाथ में होता है…

मस्त रहो….., मुस्कुराते रहो…

मस्त विचार 1159

रिश्ता, दोस्ती और प्रेम उसी के साथ रखना,

जो तुम्हारी हंसी के पीछे का दर्द,

गुस्से के पीछे का प्यार,

और मौन के पीछे की वजह समझ सके.

मस्त विचार 1158

उड़ चल रे मन, कर ले उन सपनों को पूरा

बुने थे जो तूने कभी.

मत देख आसमां को, बंद कमरे की खिड़की से.

चल, बाहर निकल और देख खुले आसमां को,

तोड़ दे सीमाओं की जंजीरों को,

चल निकल, कर ले कुछ स्वप्न तो पूरे.

न लड़ इच्छाओं से, बस लड़ ले बाधाओं से.

आगे बढ़, बढ़ता चल, बढ़ता चल.

उनको आज़ाद कराना मुश्किल है,

_ जो अपनी जंजीरों की इज़्ज़त करते हैं.

मस्त विचार 1157

उम्मीद नहीं होती जिसकी, वो भी मिल जाता है.

मुर्झा गया हो जो, वो फूल भी खिल जाता है.

बात करते हो तकदीर से ज्यादा न मिलने की,

तेरी रजा हो तो, बिना तकदीर भी मिल जाता है.

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