मस्त विचार 1278
सदा सुख दो और सुख लो
परंतु न दुःख दो न दुःख लो.
परंतु न दुःख दो न दुःख लो.
कश्ती हदे तूफां से निकल सकती है,
मायूस न हो, इरादे न बदल.
तकदीर किसी भी वक़्त बदल सकती है.
आपस के प्रेम के स्त्रोत उतने ही अधिक होंगे.
अगर ‘वक़्त’ हमारा ‘अच्छा’ हो !
उस उम्र की बातें, उम्र भर याद आती है.