मस्त विचार 1108
वो आखें कभी अपने “मुकद्दर” पे रोया नही करती.
वो आखें कभी अपने “मुकद्दर” पे रोया नही करती.
मिल जाएगी कभी न कभी, जरा कोशिश कर के तो देखिए.
संकल्प दृढ हो मन में फिर कदम बढ़ा के तो देख.
तेरी जिंदगी भी रोशनी से पुरनूर होगी.
किसी की चौखट पे तू भी दीप जला के तो देख.
यदि हम उसे ग्रहण करने की छमता रखते हैं.
फिर मनाएगा कौन ?
आज दरार है, कल खाई होगी,
फिर भरेगा कौन ?
मैं चुप, तुम भी चुप,
इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ?
बात छोटी को लगा लोगे दिल से,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?
दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़ कर,
सोचो फिर हाथ बढ़ाएगा कौन ?
न मैं राजी, न तुम राजी,
फिर माफ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?
डूब जाएगा यादों में दिल कभी,
तो फिर धैर्य बंधाएगा कौन ?
एक अहम मेरे, एक तेरे भीतर भी,
इस अहम को फिर हराएगा कौन ?
जिंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?
मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें,
तो कल इस बात पर फिर पछताएगा कौन ?
आओ हम जुड़ने के अवसर खोजें…