मस्त विचार 1108

जिन आखों को “सजदे” मे रोने की आदत हो,

वो आखें कभी अपने “मुकद्दर” पे रोया नही करती.

कई बार जिन्हें हमेशा रोने की आदत लग चुकी होती है

उन लोगों को उन्हीं के हाल पर छोड़ देना ज्यादा मुनासिब होता है !
क्योंकि वो उसी चीज के आदती हो चुके होते हैं
वो जानते हैं कि कोई भविष्य नही कुछ बातों का
फिर भी हमेशा तड़पते रहते हैं
एक छोटी सी खूबसूरत उम्र मिली है
जो बहुत महंगी होती है,
उसको क्यों ऐसे सस्ते में बर्बाद करना !
अगर फिर भी तुम नही समझोगे नही संभलोगे
तो हर संभालने वाला भी थक कर कहीं खो जाएगा
कहतें हैं कई जन्मों के बाद इंसान का जन्म मिलता है
इसे यूँही आंसुओं में बर्बाद कर देने वाले
जिन्दगी के साथ नाइंसाफ़ी ही करते हैं
और ऐसे नाइंसाफ़ी पर कुदरत भी इंसाफ नही करती !

मस्त विचार 1106

मकसद कुछ जिंदगी का ऊँचा बना के तो देख.

संकल्प दृढ हो मन में फिर कदम बढ़ा के तो देख.

तेरी जिंदगी भी रोशनी से पुरनूर होगी.

किसी की चौखट पे तू भी दीप जला के तो देख.

मस्त विचार 1104

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए,

फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है, कल खाई होगी,

फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप, तुम भी चुप,

इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ?

बात छोटी को लगा लोगे दिल से,

तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़ कर,

सोचो फिर हाथ बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी, न तुम राजी,

फिर माफ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,

तो फिर धैर्य बंधाएगा कौन ?

एक अहम मेरे, एक तेरे भीतर भी,

इस अहम को फिर हराएगा कौन ?

जिंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?

फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें,

तो कल इस बात पर फिर पछताएगा कौन ?

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