| May 21, 2016 | मस्त विचार
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
खो जाता हूँ खुद से खुद में.
मुझे होश कहाँ रहता है.
नजरें झुकीं आमंत्रण देती तुम को.
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
कैसे कैसे रंगों से नहला देते हो.
अपने ही रंग में रंग लेते हो.
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
| May 21, 2016 | मस्त विचार
उस जैसा दुखी कोई नहीं,
जो चाहता सबकुछ है, करता कुछ भी नहीं.
| May 20, 2016 | मस्त विचार
कहाँ मिला हमें कोई समझने वाला.
जो भी मिला समझकर चला गया.
| May 19, 2016 | मस्त विचार
अब ना करूँगा अपने दर्द को बयां किसी के सामने.
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यों करना.
| May 19, 2016 | मस्त विचार
“माफ़ करें दूसरों को…
इसीलिए नहीं कि वो माफ़ी के लायक हैं..,
पर ये आपके अपने मन की *शान्ति* के लिए ज़रूरी है.
| May 18, 2016 | मस्त विचार
और कितने इम्तिहान लेगा ऐ वक़्त तू,
ज़िंदगी मेरी है तो फिर मर्जी तेरी क्यूँ..