मस्त विचार 1276

बुझ जाए तो शमां तो जल सकती है,

कश्ती हदे तूफां से निकल सकती है,

मायूस न हो, इरादे न बदल.

तकदीर किसी भी वक़्त बदल सकती है.

मस्त विचार 1272

तकदीरे बदल जाती है.. जब जिंदगी जीने का कोई मकसद हो..

वर्ना जिंदगी कट जाती हे… “तक़दीर” को इल्जाम देते देते…

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