मस्त विचार 4576
अनगिनत लफ़्ज़ उस पर खर्च करके,
आख़िर में हम ख़ामोश हो गए..
आख़िर में हम ख़ामोश हो गए..
हम उसे भी जीना सीखा देते हैं, जिसे मरने का शौक हो..
कुछ ” लम्हे ” जीने का तजुर्बा भी सिखाते हैं..
अगर मैं उन्हें तोहफे में एक आईना दे दूँ..
जो हम नहीं सोचते हैं जिंदगी वो होती है..!!
दिल तुमको ही चाहे _ तो क्या किजिए…।।