मस्त विचार 4866
सिर्फ़ एक तेरे फ़र्क ना पड़ने से बहोत फ़र्क पड़ता था मुझे_
_ फिर यूं हुआ कि अब तेरे फ़र्क पड़ने से भी फ़र्क नहीं पड़ता है मुझे…
_ फिर यूं हुआ कि अब तेरे फ़र्क पड़ने से भी फ़र्क नहीं पड़ता है मुझे…
_ हम लिखते हैं सच और सुकून पाते हैं..
_ पर तुम ये याद रखो तुम कुछ नहीं बहुत कुछ करने वालों में से हो ..
_ अपने प्रत्येक फैसले को सफ़ल बनाने में सक्षम नहीं होता है.
_ रुला ही देती हैं _ किसी की कमी कभी कभी !!
जो जैसा दीखता हो __ वैसा ही हो !!