मस्त विचार 1089
“कर्मो की आवाज, शब्दों से भी ऊची होती है.
हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं,
बदले-बदले तो आप हैं जनाब,
हमारे अलावा सभी को याद रखते हैं.
कुछ लोग सिर्फ़ दूर से अच्छे लगे मुझे !!!!!!!
खामखां ए जिंदगी, तेरे स्कूल में दाखिल हुआ…
खो जाता हूँ खुद से खुद में.
मुझे होश कहाँ रहता है.
नजरें झुकीं आमंत्रण देती तुम को.
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
कैसे कैसे रंगों से नहला देते हो.
अपने ही रंग में रंग लेते हो.
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
जो चाहता सबकुछ है, करता कुछ भी नहीं.