मस्त विचार 1088

जख्म देने की आदत नहीं हमको,

हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं,

बदले-बदले तो आप हैं जनाब,

हमारे अलावा सभी को याद रखते हैं.

मस्त विचार – मुझ से तुम क्या करवा लेते हो – 1085

मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.

खो जाता हूँ खुद से खुद में.

मुझे होश कहाँ रहता है.

नजरें झुकीं आमंत्रण देती तुम को.

मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.

कैसे कैसे रंगों से नहला देते हो.

अपने ही रंग में रंग लेते हो.

मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.

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