मस्त विचार 1200

माना कि आदमी को हँसाता है आदमी;

इतना नहीं कि जितना रुलाता है आदमी;

माना गले से सब को लगाता है आदमी;

दिल में किसी-किसी को बिठाता है आदमी;

सुख में लिहाफ़ ओढ़ के सोता है चैन से;

दुख में हमेशा शोर मचाता है आदमी;

हर आदमी की ज़ात अजीब-ओ- गरीब है;

कब आदमी को दोस्तो! भाता है आदमी;

दुनिया से ख़ाली हाथ कभी लौटता नहीं;

कुछ राज़ अपने साथ ले जाता है आदमी………!!!!

मस्त विचार 1195

ये सोच है हम इंसानों की, कि एक अकेला क्या कर सकता है

पर देख जरा उस सूरज को, वो अकेला ही तो चमकता है.

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