मस्त विचार 1287
करोड़ों की भीड़ में “इतिहास” मुठ्ठी भर लोग ही बनाते हैं,
वही रचते हैं “इतिहास” जो आलोचना से नहीं घबराते हैं…
वही रचते हैं “इतिहास” जो आलोचना से नहीं घबराते हैं…
तो सुन्दर संसार हमारा न होता.
तुफानो की तबाही में गुम हो जाते,
अगर सर पे हाथ तुम्हारा न होता.
किसी एक सपने के सच होने में
किसी दूसरे सपने का, टूट जाना भी छिपा रहता है.
यह काम का बंदा है यह काम का नहीं.
दुसरों को नीचा दिखाना छोड़ दो.