मस्त विचार 1083
कहाँ मिला हमें कोई समझने वाला.
जो भी मिला समझकर चला गया.
जो भी मिला समझकर चला गया.
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यों करना.
इसीलिए नहीं कि वो माफ़ी के लायक हैं..,
पर ये आपके अपने मन की *शान्ति* के लिए ज़रूरी है.
ज़िंदगी मेरी है तो फिर मर्जी तेरी क्यूँ..
रास्ता खुद ब खुद दिखाती है !!!
चेहरा दिखाओ तो…लोग बुरा मानते हैं..