मस्त विचार 1025
मैंने उस हाल में जीने की कसम खाई है…
मैंने उस हाल में जीने की कसम खाई है…
*कागजो को एक साथ जोडे रखने वाली पिन ही कागजो को चुभती है ,* *उसी प्रकार परिवार को भी वही व्यक्ति चुभता है ,* *जो परिवार को जोड के रखता हो..!!*
लेकिन तूफान से लड़ने में मजा ही कुछ और है.
हर कोई यहॉं खुद ही में मशगुल है.
जिंदगी का बस एक ही ऊसुल है यहॉं,
तुझे गिरना भी खुद है और सम्हलना भी खुद है..
बदले में वह भी अच्छा बर्ताव ही करते हैं.
काली गहरी रातों में, उबड़- खाबड़ रास्तों में
साथ कोई हो, न हो,परवाह नहीं
अकेला ही चलता जाऊँगा.
फूल मिले या काँटे मुझे राहों में
याद दिलाते रहे मुझे जो, मेरी मंजिल के सपने
राह चलते चूक भी गया तो ग़म कैसा.
अपनी ही लड़ाई से भय कैसा.
आज नहीं तो कल जीत ही जाऊँगा
हार नहीं मानूँगा मै.