मस्त विचार 1072
जब हमारी खुशियों को किसी की बुरी नजर लग सकती है,
तो हमारे ग़मों को किसी की नजर आखिर क्यों नहीं लगती ???
है कोई जवाब ?
तो हमारे ग़मों को किसी की नजर आखिर क्यों नहीं लगती ???
है कोई जवाब ?
तो फिर देखना फिजूल है कद आसमान का.
_ पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है.
फरेब से घाव नहीं, _ तजुर्बे लिया करो !!!
क्योंकि उन्हे भरोसा था कि मै मुसीबतो से अकेले ही निपट सकता हूँ.
ना, नाराज़ है…………….ज़िन्दगी..,
बस जो है….वो आज है………..ज़िन्दगी.!!!
दूसरों पर आश्रय उस की स्वयं की सत्ता को सोख लेता है.