मस्त विचार 1205
पता है मैं हमेशा खुश क्यों रहता हूँ ?
क्योंकि मैं खुद के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता.
क्योंकि मैं खुद के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता.
मेरी छाया में राहत पाता है कोई और
तपता ही रह जाता हूँ मैं.
तेरी संगत में खुद को झुकाना सीख गए.
पहले मायुस हो जाते थे कुछ ना मिलने पर
अब तेरी रजा में राजी रहना सीख गए.
“वक़्त” ही कितना लगता है “वक़्त” बदलने में…
जिन मसलों का हल नहीं, उसे समय पर छोड़.
इतना नहीं कि जितना रुलाता है आदमी;
माना गले से सब को लगाता है आदमी;
दिल में किसी-किसी को बिठाता है आदमी;
सुख में लिहाफ़ ओढ़ के सोता है चैन से;
दुख में हमेशा शोर मचाता है आदमी;
हर आदमी की ज़ात अजीब-ओ- गरीब है;
कब आदमी को दोस्तो! भाता है आदमी;
दुनिया से ख़ाली हाथ कभी लौटता नहीं;
कुछ राज़ अपने साथ ले जाता है आदमी………!!!!