मस्त विचार 1060
छोड़ अँधेरे का दामन जब हम सूरज की ओर चले,
नाउम्मीदों के पथ पर दिये ख़ुशी के कई जले.
नाउम्मीदों के पथ पर दिये ख़ुशी के कई जले.
ढूँढ रहे दुनियाँ में खामी, अपने मन में झाँके कौन?
सबके भीतर चोर छुपा है, उसको अब ललकारे कौन?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे, खुद पर आज बिचारे कौन?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा, इस मुद्दे पर सब हैं मौनं.
गम तो किसी भी बहाने मिल जाता हैं….
रिश्ते निभाते- निभाते अपनी ही कदर खो दी हमने.
कि तुम कौन होते हो मुझसे बिछड़ने वाले.
अंधेरा वहां है जहां मन गरीब है.