मस्त विचार 1008

मंजिल तो हासिल कर ही लेंगे कहीं किसी रोज,

ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ….

अपने मन में आपके प्रति ज़हर रखने वालों से,

_दूर हो जाना किसी जीत से कम नहीं होता..

मस्त विचार 1007

अहमियत तेरी बता नहीं सकता.

रिश्ता क्या है समझा नहीं सकता.

तुम मेरे लिए इतने ख़ास हो कि,

तुम जो नहीं साथ तो मैं मुस्करा नहीं सकता.

मस्त विचार 1005

कर लेता हूँ बर्दाश्त हर दर्द, इसी आस के साथ ; _

_ कि खुदा नूर भी बरसाता है, आजमाइशों के बाद ..

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