मस्त विचार – मुझे खुद ही से तू मिला – 996

मुझे खुद ही से तू मिला.

देख के रूप तेरा कुछ यूँ लगा .

सोया था बरसों से अभी हूँ जगा .

कर दिया अब तो हवाले तुझको .

अब तो नैया पार तू लगा .

कभी – कभी अज्ञान में भटक जाता हूँ .

अपने ज्ञान रूप से रास्ता दिखा .

आया हूँ तेरे दर, करता हूँ सजदा .

कौन हूँ मै जानता नहीं .

मुझे खुद ही से तू मिला.

मस्त विचार 994

जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है,

कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है.

..पर जो हर हाल में खुश रहते हैं,

जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है.

मस्त विचार 993

यूँ तो अकेले अक्सर गिर कर संभल सकता हूँ मैं ….

तुम जो पकड़ लो हाथ मेरा, दुनिया बदल सकता हूँ मैं …..

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