मस्त विचार 1147
किसी ने ये नसीहत क्यों नहीं दी की
इंसान बन जाओ बहुत स्कोप है..
इंसान बन जाओ बहुत स्कोप है..
जान पहचान तो जान ले लेती है…
और मैं उसी से वही बात सीख लेता हूँ.
लेकिन
अपनी सोच को थोड़ा बदल कर, उस दुःख को कम जरुर कर सकता हूँ.
जबकि हमें चलना है अपने ही पैरों पर…..
भंवरों की तरह गुनगुनाते रहिए.
चुप रहने से रिश्ते भी उदास हो जाते हैं,
कुछ उनकी सुनिए कुछ अपनी सुनाते रहिए.
भूल जाइए शिकवे शिकायतों के पलों को,
और…छोटी छोटी खुशियों के मोती लुटाते रहिए.