| Mar 22, 2016 | मस्त विचार
पानी तेरे कितने नाम…..
पानी आकाश से गिरे तो…..बारिश,
आकाश की ओर उठे तो…..भाप,
अगर जम कर गिरे तो…..ओले,
अगर गिर कर जमे तो…..बर्फ,
फूल पर हो तो…..ओस,
फूल से निकले तो…..इत्र,
जमा हो जाए तो…..झील,
बहने लगे तो…..नदी,
सीमाओं में रहे तो…..जीवन,
सीमाएं तोड़ दे तो…..प्रलय,
आंख से निकले तो…..आंसू,
और शरीर से निकले तो…..पसीना.
ये पत्थर पानी का रास्ता रोकने आए हैं, उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं है.
_ पत्थरों से टकराकर पानी और उफान के साथ बहता है..!!
पानी वो है जो सब कुछ छोड़कर, भुलाकर फिर से अपनी रौ में बहने लगता है और फिर से सब ओर हरियाली – खुशहाली बिखेरने लगता है.!!
जब ब्रूस ली ने कहा – पानी की तरह बनो.
_ यह वही हाँ है.. “पानी चट्टान का विरोध नहीं करता”
_ यह उसके चारों ओर बहता है, उसे आकार देता है, उसे गले लगाता है – और आगे बढ़ता है.!!
| Mar 21, 2016 | मस्त विचार
लम्हों की खुली किताब है ज़िन्दगी,
ख्यालों और साँसों का हिसाब है ज़िन्दगी ….
कुछ जरूरतें पूरी ,कुछ ख्वाहिशें अधूरी,
इन्हीं सवालों का जवाब है ज़िन्दगी …..
| Mar 20, 2016 | मस्त विचार
‘नायाब हीरा’ बनाया है.., रब ने हर किसी को…,
पर ‘चमकता’ वही है जो.., ‘तराशने’ की हद से ‘गुज़रता है’..
| Mar 19, 2016 | मस्त विचार
मुझे खुद ही से तू मिला.
देख के रूप तेरा कुछ यूँ लगा .
सोया था बरसों से अभी हूँ जगा .
कर दिया अब तो हवाले तुझको .
अब तो नैया पार तू लगा .
कभी – कभी अज्ञान में भटक जाता हूँ .
अपने ज्ञान रूप से रास्ता दिखा .
आया हूँ तेरे दर, करता हूँ सजदा .
कौन हूँ मै जानता नहीं .
मुझे खुद ही से तू मिला.
| Mar 18, 2016 | मस्त विचार
लहरों से खेलना तो सागर का शौक है,
लगती है चोट कैसे, किनारों से पूछिये …
| Mar 17, 2016 | मस्त विचार
जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है,
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है.
..पर जो हर हाल में खुश रहते हैं,
जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है.