मस्त विचार 1115
पर जब आप दूसरों के लिए जीना सीख लेते हैं
तो वे आपके लिए जीते हैं.
पर जब आप दूसरों के लिए जीना सीख लेते हैं
तो वे आपके लिए जीते हैं.
मंज़िलों की फितरत है; खुद चलकर नहीं आती.
वो मंजिलों के उजालों को पा नहीं सकते.
पर जो हम देते हैं उससे हम जीवन बनाते हैं.
मुझे रुलाया गया दूसरों की खातिर.
किसी ने पूछा तक नहीं कि चाहतें मेरी क्या हैं.
सपनों को मेरे जलाया गया, दूसरों की खातिर.
कभी सोचा न था कि वक़्त यूँ बेरहम हो जाएगा.
अपने बन गए गैर, चंद स्वार्थों की खातिर.
क्या कहूँ बात मै इस जमाने की .
यहाँ ज़िन्दगी जीते है लोग, सिर्फ अपनी ही खातिर.
अक्सर मैं सोचा करता हूँ, दुनिया भर की बातें
इस चिंता मे राख करी हैं मैंने कितनी रातें,
सब कुछ मेरी सोच मुताबिक कभी नहीं होता है
या तो मैं अलग हूँ इस दुनिया से
या ये सबके साथ मे भी होता है
लेकिन फिर भी सारी दुनिया कुछ नहीं कहती है
अपने दिल मे चुपके चुपके सब कुछ ये सहती है
ये दुनिया अपनी है तो फिर क्यूँ है लोग पराये ?
कोई खुशियों मे डूबा है किसी पे गम के साये !!
दूसरों का दुःख देखकर क्यूँ खुश होते कुछ लोग ?
खुशी किसी की देखकर जलते क्यूँ हैं लोग ?
क्या ये मुमकिन है
सारी दुनिया सबको समझे अपना
पता नहीं कितने लोगो ने देखा ऐसा सपना ?
जन्नत क्या है दोजख क्या है शायद सबने देखा है
खुद करते हैं फिर कहते है
ये तो किस्मत का लेखा है.