मस्त विचार 905

सब ने सोना ख़रीदा, मैंने सुई खरीद ली.

सपनों को बुनने जितनी डोरी खरीद ली.

शौक- ए- ज़िन्दगी कुछ कम किए,

फिर सस्ते में ही सुकून-ए-ज़िन्दगी खरीद ली.

मस्त विचार 904

तेरी याद जब आती हैं तो उसे रोकते नहीं हम….

क्योंकि जो बगैर दस्तक के आते हैं वो अपने ही होते हैं….

मस्त विचार 903

तू दिन रात कोशिशें करता है किनारा ढूँढने की,

हम तो समुद्र में डुबकियाँ लगा कर ही जीने का मजा लेते हैं. 

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