मस्त विचार 1075
अब डर लगता है मुझे उन लोगों से…
जो कहते हैं, “मेरा यक़ीन तो करो”
जो कहते हैं, “मेरा यक़ीन तो करो”
अगर सुख नहीं रहे तो दुख भी नहीं रहेंगे.
कहनी मुझे उनसे एक बात बाकि है,
मौत भी अगर आ जाये तो मैं कह दूंगा ज़रा रूक,
अभी मेरे यार से एक मुलाकात बाकी है.
तो हमारे ग़मों को किसी की नजर आखिर क्यों नहीं लगती ???
है कोई जवाब ?
तो फिर देखना फिजूल है कद आसमान का.
_ पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है.
फरेब से घाव नहीं, _ तजुर्बे लिया करो !!!