मस्त विचार 957

उठ कर गिरना …गिर कर उठना

जीवन की रीत पुरानी है

चट्टानों से टकराने की हमने जीवन में ठानी है.

मस्त विचार 956

आप की यादो को पसन्द आ गई है मेरी….आँखों की नमी,

हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है….आप की कमी..

मस्त विचार – तू ने इतना बचाया है – 955

तू ने इतना बचाया है

हसने लगी ज़िन्दगी, मन मुस्कुराया हैं

दिव्यदृष्टि देकर के, अँधेरा मिटाया हैं

नज़रे नूरानी से, स्वरुप दिखाया हैं

गिर गए थे हम तो, तू ने उठाया हैं

अवगुण नहीं देखे, गले से लगाया हैं

अनमोल खज़ाना देकर, बादशाह बनाया हैं

विषयों के कीचड़ में, गिरने से बचाया हैं

मुरझाया मन का चमन, तू ने खिलाया हैं

भूल गए थे हसना, तू ने हसाया हैं

संसार सागर से, तू ने तराया हैं

मन पर जन्मो से, गफलत का पर्दा था

दुई का पर्दा हटा कर, नींद से जगाया हैं

कैसे भूलूँ रहमत, तन मन चमकाया हैं

तू ने इतना बचाया है.

मस्त विचार 954

कभी कभी यूँ भी हम ने अपने जी को बहलाया है…..

जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया हैं…..

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