मस्त विचार 1063
दीपक तो अँधेरे में जला करते हैं,
फूल तो काँटों में भी खिला करते हैं,
थक कर ना बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
हीरे अक्सर कोयले में ही मिला करते हैं.
फूल तो काँटों में भी खिला करते हैं,
थक कर ना बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
हीरे अक्सर कोयले में ही मिला करते हैं.
मेरी काबिलियत निखरी है तेरी हर आजमाईश के बाद….
नाउम्मीदों के पथ पर दिये ख़ुशी के कई जले.
ढूँढ रहे दुनियाँ में खामी, अपने मन में झाँके कौन?
सबके भीतर चोर छुपा है, उसको अब ललकारे कौन?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे, खुद पर आज बिचारे कौन?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा, इस मुद्दे पर सब हैं मौनं.
गम तो किसी भी बहाने मिल जाता हैं….