मस्त विचार 1086
ना अनपढ़ रहा, ना काबिल हुआ..
खामखां ए जिंदगी, तेरे स्कूल में दाखिल हुआ…
खामखां ए जिंदगी, तेरे स्कूल में दाखिल हुआ…
खो जाता हूँ खुद से खुद में.
मुझे होश कहाँ रहता है.
नजरें झुकीं आमंत्रण देती तुम को.
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
कैसे कैसे रंगों से नहला देते हो.
अपने ही रंग में रंग लेते हो.
मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.
जो चाहता सबकुछ है, करता कुछ भी नहीं.
जो भी मिला समझकर चला गया.
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यों करना.
इसीलिए नहीं कि वो माफ़ी के लायक हैं..,
पर ये आपके अपने मन की *शान्ति* के लिए ज़रूरी है.