मस्त विचार 895
क्यों कि सुधरना मुझे हैं उस को नही.
क्यों कि सुधरना मुझे हैं उस को नही.
मौन शब्दों से, नजरों की जुबां से, बातों को होने दो.
मेरे रहते तुम उदास हो, अच्छी बात नहीं है.
क्योंकि उन्हें अच्छाइयों कि दिव्यता का,
ना तो ज्ञान होता है और ना अनुभव.
दुनिया का चेहरा, बड़ी गहराई से दिखलाया है. एक- एक रिश्ते की अहमियत को, बड़े प्यार से समझाया है. रिश्तों की असलियत दिखा कर, उस ने अपना प्यार मेरे मन में जगाया है. हर रस्ते पे उस ने मेरा हाथ पकड़ा, और मुझे तूफानों से बचाया है. क्या गुण गाऊं उस के, जिस ने मुझ जैसे को भी गले लगाया है. मैंने यार ऎसा पाया है, जिस ने मुझे जीना सिखाया है.
सामजिक रिश्ते और मानवता का नाता. इन चार कैटेगरी में सारे रिश्ते आ जाते हैं और इन्ही के इर्दगिर्द हम जीवन गुजार लेते हैं.