समझ ……… कोई बात तत्काल उसी समय समझ में आ जाती है, कोई कुछ घण्टों में समझ आती है, कुछ को कुछ दिन, किसी बात को कुछ महीने और साल लग जाते हैं, कुछ बात दूसरे के दृष्टिकोण से सही होने पर भी हमें समझ नहीं आती. अतः बहस बहुत विचार कर करें और किसी बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न कभी न बनाएँ.
मस्त विचार 938
अब तो किस्मत ही मिला दे तो मिला दे,
वरना हम तो बिछड़ गए हैं तुमसे
तूफ़ान में परिंदों की तरह.
मस्त विचार 937
उम्मीद अपने आप से रखो… किसी और से नहीं.
खुश रहने का सीधा सा एक ही मंत्र,
मस्त विचार 936
बस इतना कह सकता हूँ बहुत याद आते हो “तुम”…
अल्फाज नही है तुम्हारी यादों को बयां करने के लिए…
मस्त विचार 935
जिन पलों में तू था, वे पल ढूंढ़ते हैं हम. कारवां खुशी का, जाने कब गुजर गया. रेत पर अब उस के, निशान ढूंढ़ते हैं हम. दुनिया की भीड़ में, कहाँ खो गया है वो. हर गली में, उनका मकान ढूंढ़ते हैं हम. कर भी नहीं गया, वादा वो आने का. फिर भी हर आहट में, उसे ढूंढ़ते हैं हम.
आज भी उन राहों पे, तेरे कदम ढूंढ़ते हैं हम.
मस्त विचार 934
मेरी मंज़िल तो आसमान है.. रास्ता मुझे खुद बनाना है.
सीढ़ियां उन्हे मुबारक हो, जिन्हे छत तक जाना है..





