मस्त विचार 932

दीया जला सकते हो तो जलाओ.

जलते हुए में घी डाल सकते हो, तो डालो.

और यह भी नहीं कर सकते तो, मत करो.

लेकिन जलते हुए दीये को बुझाओ मत.

मस्त विचार 931

अक्सर यूँ ही एक सवाल आता है उमड़ कर जेहन में मेरे,

आज बे वजह क्यूँ भूल गये कल तक बेवजह चाहने वाले.

मस्त विचार 929

लोग करतें हैं कोशिश जितना मुझे रुलाने की.

मुझे मिलती है ताकत और मुस्कुराने की.

वो समझतें हैं बिखर जाऊँगा.

मुझे यकीन है और निखर जाँऊगा.

मैंने गिर- गिर के अपने आप को उठाया है.

मुझे यकीन है रब का मुझ पर साया है.

मस्त विचार 928

दूसरों को बहुत बार बदलना चाहा,

एक बार खुद को बदल कर देखो.

दूसरों को कई बार सुधारना चाहा,

एक बार खुद को सुधार कर देखो.

दूसरों को बारबार सीख देनी चाही,

एक बार खुद को सीख दे कर देखो.

दूसरों को हमेशा उपदेश देने चाहे,

एक बार खुद उन का पालन कर के देखो.

दूसरों को बारबार कष्ट देना चाहा,

एक बार खुद को कष्ट दे कर देखो.

दूसरों को बहुत बार भरोसा दिलाना चाहा,

एक बार खुद पर भरोसा कर के देखो.

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