मस्त विचार 1007
अहमियत तेरी बता नहीं सकता.
रिश्ता क्या है समझा नहीं सकता.
तुम मेरे लिए इतने ख़ास हो कि,
तुम जो नहीं साथ तो मैं मुस्करा नहीं सकता.
रिश्ता क्या है समझा नहीं सकता.
तुम मेरे लिए इतने ख़ास हो कि,
तुम जो नहीं साथ तो मैं मुस्करा नहीं सकता.
तो कभी ख़ुद को आज़माईये, नतीजे बेहतर होंगें.
_ कि खुदा नूर भी बरसाता है, आजमाइशों के बाद ..
हम कोशिश भी ना करें , ये तो गलत बात है.
सच तो ये है की हम जीना ही देर से शुरू करते हैं.
….. फिर भी बाज नहीं आते लोग बुरा सा मुंह बनाने में…….!!