मस्त विचार 936

अल्फाज नही है तुम्हारी यादों को बयां करने के लिए…

बस इतना कह सकता हूँ बहुत याद आते हो “तुम”…

मस्त विचार 935

आज भी उन राहों पे, तेरे कदम ढूंढ़ते हैं हम.

जिन पलों में तू था, वे पल ढूंढ़ते हैं हम.

कारवां खुशी का, जाने कब गुजर गया.

रेत पर अब उस के, निशान ढूंढ़ते हैं हम.

दुनिया की भीड़ में, कहाँ खो गया है वो.

हर गली में, उनका मकान ढूंढ़ते हैं हम.

कर भी नहीं गया, वादा वो आने का.

फिर भी हर आहट में, उसे ढूंढ़ते हैं हम.

मस्त विचार 934

सीढ़ियां उन्हे मुबारक हो, जिन्हे छत तक जाना है..

मेरी मंज़िल तो आसमान है.. रास्ता मुझे खुद बनाना है.

मस्त विचार 932

दीया जला सकते हो तो जलाओ.

जलते हुए में घी डाल सकते हो, तो डालो.

और यह भी नहीं कर सकते तो, मत करो.

लेकिन जलते हुए दीये को बुझाओ मत.

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