मस्त विचार 995
लगती है चोट कैसे, किनारों से पूछिये …
लगती है चोट कैसे, किनारों से पूछिये …
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है. ..पर जो हर हाल में खुश रहते हैं, जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है.
तुम जो पकड़ लो हाथ मेरा, दुनिया बदल सकता हूँ मैं …..
किससे करें शिकायत,ख़ुद ही बदल गई ज़िन्दगी……
तब जा के चढ़ा हूँ मै लोगों की निगाहों में.
पर क्या पता था बदलता हुआ वक़्त ज़िन्दगी बदल देगा.