मस्त विचार 971
हम तो हैं उन फूलों जैसे. जो काँटों में भी जी लेते हैं.
हम तो हैं उन फूलों जैसे. जो काँटों में भी जी लेते हैं.
जो चल रहा है उस के पैरों में छाला होगा, बिना संघर्ष के इंसान चमक नहीं सकता, जो जलेगा उसी दिए में तो उजाला होगा.
लोग झूठ कहते हैं कीं., खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे..
फिर मत कहना की चले भी गये, और बताया भी नहीं.
मंज़िल आप पाओ, रास्ता हम दिखाएँगे,
खुश आप रहो, ख़ुशी हम दिलाएँगे,
बस आप साथ देते रहो,
साथ हम निभाएँगे.
फिर भी इन होठों पे मुस्कान है, जीना जब हर हाल में है तो, फिर मुस्कुराकर जीने में क्या नुकसान है !!