मस्त विचार 884

ज़िन्दगी तेरे साये में लोग रोज घुट- घुट कर मरते हैं,

ना जाने क्यूँ फिर भी लोग जीना तुझी को कहतें हैं.

मस्त विचार 883

ज़िन्दगी और मौत के बीच होने वाली हलचल का नाम ही ज़िन्दगी है.

कुछ लोग हमारे जीवन में केवल हलचल मचाने के लिए आते हैं, कुछ कहने नहीं..
_ कुछ जगाते हैं, फिर आगे बढ़ जाते हैं.!!

मस्त विचार 881

सिक्के हमेशा आवाज करते हैं, मगर नोट खामोश रहते हैं.

_ इसलिए जब आपकी कीमत बढे तो शांत रहिए.
_अपनी हैसियत का शोर मचाने का जिम्मा आप से कम कीमत वालों के लिए है.

मस्त विचार 880

ये चन्द पंक्तियाँ जिसने भी लिखी है, खूब लिखी है

ग़लतियों से जुदा तू भी नही,

मैं भी नही,

दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही,

मैं भी नही ..

” तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर,

अपने अंदर झाँकता तू भी नही,

मैं भी नही ” ..

” ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ,

वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही.

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