मस्त विचार 965
डूब कर मुझ को उबरना आ गया.
डूब कर मुझ को उबरना आ गया.
ये हमें ना हँसा सकी हम इसे हँसा लेंगे.
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.. मै गुजरे पल को सोचूँ तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.. अब जाने कौन कहाँ आबाद हैं, मुलाक़ात नहीं है एक मुद्दत से, मै देर रात तक जागूँ तो , कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.. कुछ की बातें थीं फूलों जैसी, कुछ के लहजे थे खुशबू जैसे, मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.. वो पल भर के झगडे&नाराजगी, फिर मान भी जाना पल भर में, आज मैं खुद से भी रूठूँ तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते है…….ll
आजकल अपने काम से काम रखने लगा हुँ मैं !!!
अँधियारा है घना, और लहू से सना, किरणों के तिनके अम्बर से चुन के अंगना मे फिर आजा री, हमने तुम पे हज़ारो सितम है किए, हमने तुम पे दुनिया भर के जुल्म है किए, हमने सोचा नहीं, तू जो उड़ जाएगी, ये जमी तेरे बिन सूनी रह जाएगी ,, किस के दम पे सजेगा हमारा अंगना ….. ओ री चिरिया !!!!