मस्त विचार 950

कभी जो वक्त की लू जिस्म को जलाती है….

ऐसे में तेरे ख्याल की बारिशों में भीगता हूँ मैं…….

मस्त विचार 949

कुछ कोशिश थी,अलहदा कर गुजरने की

कुछ कोशिश थी, अपने से खुद मिलने की

कुछ कोशिश थी. जमाने की चाल से अलग

अपना सा मुकाम पाने की.

मस्त विचार 948

समस्याएं इतनी ताक़तवर नहीं हो सकती.. जितना हम इन्हें मान लेते हैं,

_ कभी सुना है ,, कि”.. अंधेरों ने सुबह होने ही ना दी हो.!!

सबसे ताक़तवर वही है, जो टूटते ख्वाब, बिखरते रिश्ते और डगमगाते सपनों के बीच भी हिम्मत रखे और बोले.. “मैं ठीक हूं”
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