मस्त विचार 941

शिकायतें तो बहुत थी जमाने से,

जो जवाब मांगने निकला तो,

खुद को सवालों से घिरे पाया,

सोचा, लोगों को उनकी असलियत

बता दूँ,

जब देखा सामने तो,

खुद को आइने के सामने पाया.

परेशानी का सबब बनना है आसान,

रास्ता निकालना जरा है मुश्किल.

सबके साथ चल, सबकी बात कर,

साथी हैं सब सफर के.

तंग है तो क्या मलाल है.

आज है गम तो, कल खुशहाल है.

सुख-दुख तो मौसम हैं जीवन के,

बदल जायेगा मौसम,

रात ऋतु के बदलते.

रोता हुआ आया था,

रुलाते हुए जाना है.

सबकी ख़ुशी में शरीक हो ले,

कट जाएगा रास्ता,

फिर हँसते-हँसते.

जो हासिल है, वो भी कम तो नहीं.

बन जा सहारा किसी डूबते का,

चाहे खुद को तिनका समझ कर. Pk

मस्त विचार 939

समझ ……… कोई बात तत्काल उसी समय समझ में आ जाती है, कोई कुछ घण्टों में समझ आती है, कुछ को कुछ दिन, किसी बात को कुछ महीने और साल लग जाते हैं, कुछ बात दूसरे के दृष्टिकोण से सही होने पर भी हमें समझ नहीं आती. अतः बहस बहुत विचार कर करें और किसी बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न कभी न बनाएँ.

मस्त विचार 938

अब तो किस्मत ही मिला दे तो मिला दे,

वरना हम तो बिछड़ गए हैं तुमसे

तूफ़ान में परिंदों की तरह.

मस्त विचार 936

अल्फाज नही है तुम्हारी यादों को बयां करने के लिए…

बस इतना कह सकता हूँ बहुत याद आते हो “तुम”…

error: Content is protected