मस्त विचार 840

हँस कर कबूल क्या कर ली कुछ सजाए हमने.

जमाने का तो दस्तूर बन गया है, हर इल्जाम हम पर लगाने का.

मस्त विचार 839

उधार देने वाला उस आदमी की तरह है जो आप को उस वक़्त तो छाता देता है जब सूरज चमकता है, लेकिन पानी बरसते ही वह उसे वापस मांगने लगता है.

मस्त विचार 838

जब ज़िंदगी तुम्हें कोई नया मौका दे, _

_ तो पुरानी गलतियों को दोहराने की गलती कभी मत करना !!

मस्त विचार 837

जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है…

मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हसाना चाहता है….

जाने क्या बात झलकती है मेरे इस चेहरे से……

हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है……

मस्त विचार 836

खाली हाथ आया था, खाली हाथ जाऊंगा.

धूल के मानिंद में, हवा सा बिखर जाऊंगा.

दुनिया तेरी छोड़ कर, पल में खाक हो जाऊंगा.

मिट्टी से बना हुआ हूँ, मिट्टी में मिल जाऊंगा.

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