मस्त विचार 841
एक तेरा साथ ही काफी है, ‘जशन-ऐ-ज़िन्दगी के लिए…
मुझे महफिलों की चाहत ही न रही कभी…
एक तेरा साथ ही काफी है, ‘जशन-ऐ-ज़िन्दगी के लिए…
मुझे महफिलों की चाहत ही न रही कभी…
जमाने का तो दस्तूर बन गया है, हर इल्जाम हम पर लगाने का.
_ तो पुरानी गलतियों को दोहराने की गलती कभी मत करना !!
मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हसाना चाहता है…. जाने क्या बात झलकती है मेरे इस चेहरे से…… हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है……
जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है…
धूल के मानिंद में, हवा सा बिखर जाऊंगा. दुनिया तेरी छोड़ कर, पल में खाक हो जाऊंगा. मिट्टी से बना हुआ हूँ, मिट्टी में मिल जाऊंगा.
खाली हाथ आया था, खाली हाथ जाऊंगा.