मस्त विचार 818

मैं उस किस्मत का सबसे पसंददीदा खिलौना हूँ…

वो रोज़ जोड़ती है मुझे., फिर से तोड़ने के लिए……

खिलौनों से शुरू हुई थी ज़िन्दगी, अब खिलौना बन कर रह गई है..!!

मस्त विचार 817

जिन्दगी के सफर से, बस इतना ही सबक सीखा है.

सहारा कोई कोई ही देता है,

धक्का देने को हर शख्स तैयार बैठा है.

मस्त विचार 814

मैं मिटा दू अपने को

…………तो…… भी…… मैं…..रह जायेगा

तू आजा मुझ मे…………. फिर तू ही रह जायेगा…

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