मस्त विचार 813
मंजिल पता है के मौत है, फिर भी दौड़ रही है…
मंजिल पता है के मौत है, फिर भी दौड़ रही है…
उसे कोई भी हरा नहीं सकता है.
भींगी पलकों के संग मुस्कुराता हूँ मै, तुम दूर मुझ से हो तो क्या हुआ, अपनी हर सांस मे तेरी आहट पाता हूँ मै.
बस ‘दुआयें’ आप लोगों की उन्हें ‘मुकम्मल’ होने नही देती…..!!!
तेरे लिए दुआ माँगना अच्छा लगता है……..
कदम-कदम पर समझौता मेरे बस की बात नहीं….!!!!