मस्त विचार 807
वरना लोगों की वाह -वाह में, खुद को न जाने क्या समझ बैठे.
वरना लोगों की वाह -वाह में, खुद को न जाने क्या समझ बैठे.
और जो इंसान के बाहर छलक जायें वो ” अभिमान ”
जब बरसी ख़ुशियाँ न जाने भीड़ कहां से आ गयी..!!
स्वयं का बचाव करने के लिए ..कभी भी दूसरों पर दोषारोपण न करें, _ क्यों कि समय के पास…..सत्य को प्रकट करने का अपना तरीका है.
_ वे उसका बचाव करते हैं..जिससे उन्हें फायदा होता है..!!
बल्कि.. यह तो आपकी च्वाइस है.. जब तक आप खुद खुश नही रहना चाहेंगे, आप को कोई खुश नहीं कर सकता..
….. ये दुनिया न मेरा घर है न तेरा ठिकाना…!