मस्त विचार 887

चाहते हो भीगना बरसात में, तो मेरी इन आँखों में देखो,

ये बरसात तो सबके लिए होती है, लेकिन ऐ मेरे यार ये आँखें,

सिर्फ तुम्हारे लिए रोती हैं.

मस्त विचार 886

अब तुझे रोज़ ना सोचें तो तड़प उठते हैं हम…….!

अब आदी हो चुके हैं तेरी यादों का नशा करते-करते ……!!

मस्त विचार 884

ज़िन्दगी तेरे साये में लोग रोज घुट- घुट कर मरते हैं,

ना जाने क्यूँ फिर भी लोग जीना तुझी को कहतें हैं.

मस्त विचार 883

ज़िन्दगी और मौत के बीच होने वाली हलचल का नाम ही ज़िन्दगी है.

कुछ लोग हमारे जीवन में केवल हलचल मचाने के लिए आते हैं, कुछ कहने नहीं..
_ कुछ जगाते हैं, फिर आगे बढ़ जाते हैं.!!
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