मस्त विचार 829
वरना पत्तों की तरह तुझको हवा ले जायेगी…..
जीने की आरज़ू है तो जी चट्टानों की तरह…..
वरना पत्तों की तरह तुझको हवा ले जायेगी…..
जीने की आरज़ू है तो जी चट्टानों की तरह…..
कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम……
माना कि इस ज़मी को न गुलज़ार कर सके….
दिल दुखा कर जो मिले वो फायदा अच्छा नही…….
मुख़्तसर सी बात है ये जान पाओ, जान लो…..
जिसके सामने आईना रखा,हर शख्स वो मुझ से रूठ गया.
फिर दूसरों को बदलना कैसे सरल हो सकता है.
कभी सोचिए कि स्वयं को बदलना कितना कठिन है,
तू मेरा शौक़ देख मेरा इन्तज़ार देख……..
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं……