मस्त विचार 887
चाहते हो भीगना बरसात में, तो मेरी इन आँखों में देखो,
ये बरसात तो सबके लिए होती है, लेकिन ऐ मेरे यार ये आँखें,
सिर्फ तुम्हारे लिए रोती हैं.
ये बरसात तो सबके लिए होती है, लेकिन ऐ मेरे यार ये आँखें,
सिर्फ तुम्हारे लिए रोती हैं.
अब आदी हो चुके हैं तेरी यादों का नशा करते-करते ……!!
अब तुझे रोज़ ना सोचें तो तड़प उठते हैं हम…….!
कोई भी मुझे मेरी आज्ञा के बिना दुखी नहीं कर सकता.
ना जाने क्यूँ फिर भी लोग जीना तुझी को कहतें हैं.
ज़िन्दगी तेरे साये में लोग रोज घुट- घुट कर मरते हैं,
ज़िन्दगी और मौत के बीच होने वाली हलचल का नाम ही ज़िन्दगी है.
जवाब आसान और सवाल मुश्किल करता है…
कोई भी फैसला, जब ये दिल करता है…