सिक्के हमेशा आवाज करते हैं, मगर नोट खामोश रहते हैं.
_ इसलिए जब आपकी कीमत बढे तो शांत रहिए.
_अपनी हैसियत का शोर मचाने का जिम्मा आप से कम कीमत वालों के लिए है.
मस्त विचार 880
ग़लतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही, दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही, मैं भी नही .. ” तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर, अपने अंदर झाँकता तू भी नही, मैं भी नही ” .. ” ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ, वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही.
ये चन्द पंक्तियाँ जिसने भी लिखी है, खूब लिखी है
मस्त विचार 879
कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं,,, और कभी रास्तों पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं…!
रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं…
मस्त विचार 878
सुनने वाले तो बहुत हैं मगर समझने वाला कोई नहीं..!!
किन लफ़्ज़ों में बंया करूँ मैं अपने दर्द को..!
मस्त विचार 877
कभी पीठ पीछे आपकी बात चले तो घबराना मत
बात तो ” उन्ही की होती है ” जिन मे कोई ” बात ” होती है !!
मस्त विचार 876
लोग इन्तजार करते रह गये कि हमें टूटा हुआ देखें,
और हम थे कि सहते सहते पत्थर के हो गये..!!




